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Tuesday, June 23, 2020

Benefits of Sahaja Yoga Meditation - Hindi Article

सहजयोग ध्यान के 100 लाभः


(पवन प्रभाकर जी द्वारा अंग्रेजी में भेजी गई पोस्ट का हिंदी अऩुवाद)

मनोवैज्ञानिक लाभः

1. इससे शरीर में औक्सीजन की खपत कम हो जाती है।
2. इससे श्वसन प्रक्रिया की दर में कमी आ जाती है।
3. इससे रक्त संचार में बृद्धि हो जाती है और दिल की धड़कन की दर
भी कम हो जाती है।
4. इससे व्यायाम करने की क्षमता बढ़ जाती है।
5. शारीरिक विश्राम का स्तर बढ़ जाता है।
6. उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिये अत्यंत लाभदायक है।
7. रक्त में लैक्टेट की कमी के कारण एंग्जाइटी या उद्विग्नता कम हो जाती है।
8. मांसपेशियों के तनाव में कमी आ जाती है।
9. गठिया या एलर्जी जैसे पुराने रोगों में आरामदायक है।
11. औपरेशन के बाद होने वाली परेशानियों में कमी आ जाती है।
12. रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ा देता है।
13. वाइरस की गतिविधियों औरभावनात्मक परेशानियों को कम कर देता है।
14. ऊर्जा, शक्ति और जोश को बढ़ा देता है।
15. वजन बढ़ाने में सहायता करता है।
16. फ्री रेडिकल में कमी आ जाती है और टिश्यू कम नष्ट होता है।
17. त्वचा की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है।
18. कोलेस्ट्रौल के स्तर में कमी आ जाती है और कार्डियोवैस्कुलर रोगों के खतरों में कमी आ जाती है।
19. फेफड़ों में वायु का प्रवाह बढ़ जाता है और सांस लेने में सरलता हो जाती है।
20. आयु वृद्धि की प्रक्रिया में कमी आ जाती है।
21. DHEAS (Dehydroepiandrosterone)के स्तर में कमी आ जाती है।
22. जीर्ण रोगों में होने वाले दर्द में कमी आ जाती है।
23. पसीना कम आता है।
24. सिरदर्द और माइग्रेन ठीक हो जाता है।
25. मस्तिष्क की कार्यशैली व्यवस्थित हो जाती है।
26. अधिक दवाओं आदि की जरूरत नहीं रह जाती है।
27. ऊर्जा की कम खपत होती है।
28. खेल आदि गतिविधियों मेंमन लगने लगता है।
29. कम ऊर्जा की खपत होती है।
30. अस्थमा या दमा रोग में लाभ होता है।
31. खेल कूद संबंधी गतिविधियों में क्षमता सेअधिक सफलता प्राप्त होती है।
32. आपका वजन यथोचित रहता है।
33. हमारी अंतस्त्रावी प्रणाली को ठीक करता है।
34. हमारे तंत्रिका तंत्र को ठीक रखता है।
35. मस्तिष्क की विध्युत तरंगों की गतिविधि में स्थाई एवं लाभकारी परिवर्तन आने लगते हैं।
36. बांझपन ठीक हो जाता है ( बांझपन से होने वाले तनाव से नियमित डिंबोत्सर्जन में सहायक हार्मोन्स प्रभावी हो जाते है।
37. आत्मविश्वास में वृद्धि होने लगती है।
38. सेरिटोनिन का स्तर बढ़ जाता है जो व्यवहार व मानसिक अवस्था को प्रभावित करता है।
39. डर व भय आदि को समाप्त करदेता है।
40. अपने विचारों पर नियंत्रण होने लगता है।
41. ध्यान केंद्रित करने में व मन को एकाग्र करने में सहायता करता है।
42. सृजनात्मकता में वृद्धि होती है।
43. मस्तिष्क की तरंगों की संबद्धता में वृद्धि होनेलगती है।
44. नवजीवन का संचार होता प्रतीत होता है।
45. स्मृति और सीखने की क्षमता में सुधार होने लगता है।
46. भावनात्मक स्थायित्व सुधरने लगता है।
47. आपसी संबंधों में सुधारआने लगता है। मानसिक आयु बढ़ने की गति भी धीमी हो जाती है।
48. बुरी आदतें स्वयमेव छूटजाती हैं।
49. अंतर्ज्ञान या intuition विकसित होने लगता है।
50. उत्पादकता में वृद्धि होने लगती है।
51. घर या कार्यस्थल पर आपसी संबंधों में सुधार आने लगता है।
52. किसी भी परिस्थिति से निपटने में दृष्टिकोण मेंव्यापकता आ जाती है।
53. व्यर्थ के मुद्दों की अनदेखी करना आ जाता है।
54. जटिल समस्याओं का समाधान करना आ जाता है।
55. चरित्र में शुद्धता आ जाती है।
56. इच्छाशक्ति में वृद्धि हो जाती है।
57. मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों के बीच संवाद में वृद्धि हो जाती है या उनमें सामंजस्य स्थापित हो जाता है।
58. किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में तीव्रता और प्रभावपूर्ण ढंग से प्रतिक्रिया करना आ जाता है।
59. व्यक्ति की अवधारणात्मक क्षमता व गत्यात्मक कार्यनिष्पादन में वृद्धि होती है।
60. बुद्धि विकास की दर बढ़ जाती है।
61. अपने कार्य से संतुष्टि( job satisfaction) मिलती है।
62. अपने प्रिय लोगों के साथ संबंधों में मधुरता में वृद्धि होती है।
63. संभावित मानसिक रोगों में कमी आती है।
64. सामाजिक व्यवहार में सुधार आने लगता है।
65. व्यवहार की उग्रता में भी कमी आती है।
66. धूम्रपान व मदिरापान कीआदत कम करने में सहायक है।
67. दवाओं पर निर्भरता कम हो जाती है और उनकी जरूरत भी कम
पड़ती है।
68. नींद की कमी से उबरने के लिये अधिक नींद की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
69. नींद आने के लिये कम समय की आवश्यकता पड़ती है।
70. उत्तरदायित्व की भावना में वृद्धि होती है।
71. सड़क चलते लड़ाई झगड़े कम होते हैं।
72. व्यर्थ के विचारों में कमी आती है।
73. चिंता करने की प्रवृत्ति में कमी आती है।
74. सुनने की क्षमता में वृद्धि होती है और लोगों के प्रति हमदर्दी में वृद्धि भी
होती है।
75. सहनशक्ति में वृद्धि होती है।
76. सही निर्णय करने में सहायक होता है।
77. रचनात्मक तरीके से कार्य करने के लिए मानसिक संतुलन देता है।
78. व्यक्तित्व को संतुलन प्रदान करता है।
79. भावनात्मक परिपक्वता देता है।

ध्यान से आध्यात्मिक लाभः

80. चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में रखने में मदद करता है।
81. मन को शांति और प्रसन्नता प्रदान करता है।
82. आपको अपने जीवन का उद्देश्य मालूम होने लगताहै।
83. स्व-यथार्थीकरण में वृद्धि होती है।
84. दूसरों के लिये करूणा में वृद्धि होती है।
85. विवेक में वृद्धि होती है।
86. अपने व दूसरों के विषय में गहन समझ विकसित होती है।
87. शरीर, मन और आत्मा को एकरूप करता है।
88. क्षमा की शक्ति में वृद्धि होती है।
89. स्वयं को स्वीकार करने की शक्ति बढ़ती है।
90. जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण बदलने लगता है।
91. परमात्मा के साथ एक गहन संबंध का सृजन होता है।
92. गहन आध्यात्मिक विश्रांति मिलती है।
93. जीवन में समक्रमिकता ( synchronization) बढ़ जाती है।
94. व्यक्ति आत्मोन्मुख हो जाता है।
95. व्यक्ति वर्तमान में जीने लगता है।
96. सब लोगों से प्रेम करने की क्षमता में वृद्धि होने लगती है।
97. अहं व चेतना के परे देखने की शक्ति बढ़ जाती है।
98. सबके लिये एकता का भाव जागृत हो जाता है।
99. आपकी चेतना जागृत हो जाती है और आप ज्ञानी बन जाते हैं।
100. ज्ञान की एक आंतरिक भावना का अनुभव होने लगता है।

Cure Body Diseases With Sahaja Yoga Practice

कई बीमारियों से निजात दिलाता है सहज योग का अभ्यास


हम हमेशा से सुनते आ रहे है, यदि इन्सान में इच्छा शक्ति हो तो वो हर चीज़ कर सकता है| जब यह तथ्य सही है तो व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को भी सुधार सकता है| प्राचीन समय ने हमें विरासत में कई तकनीक दी है, जिनकी बदोलत व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है, बस जरुरत है इन्हें अपनाने की|



गुरु नानक, संत ज्ञानेश्वर आदि महान ज्ञानियों के प्रवचन में सहज योग का उल्लेख मिलता है| सहज योग की मदद से कई लाइलाज बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है| इससे मानसिक, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक सभी तरह के लाभ शरीर को मिलते है|

यह आत्मज्ञान को प्राप्त करने की बहुत ही सुलभ ध्यान पद्धति है। इस पद्धति को सीख कर हर इन्सान अपने हर कार्य को व अपने जीवन को सफल कर सकता है| इससे तनाव दूर होता है, इससे पीठ दर्द से राहत मिलती है| इसका अभ्यास करने वाला व्यक्ति पूरा दिन उर्जा से परिपूर्ण होता है| आइये आज के लेख में विस्तार से जानते है 


जाने इसके बारे में संपूर्ण जानकारी


यदि हम सहज योग की बात करे तो इसकी खोज माता जी निर्मला देवी ने की थी| यह योग परमात्मा की सर्वव्यापक शक्ति से जु़ड़ने का अत्यंत सरल मार्ग है| 

दरहसल जब भी ईश्वरीय शक्ति जागृत होती है, व्यक्ति का सृजनात्मक व्यक्तित्व व उत्तम स्वास्थ्य का विकास होने लगता है|

सहज योग के अर्थ को यदि हम विस्तृत करे तो ‘सह’ का अर्थ है हमारे साथ, ‘ज’ का अर्थ है पैदा हुआ और ‘योग’ का अर्थ है संघ।

मानव पर परमात्मा की कृपा बरसने लगती है, जिसके चलते उसकी अंतर्जात प्रतिभा खिल उठती है, वह तनाव युक्त जीवन पाता है साथ ही निःस्वार्थ प्रेम एवं आनंद में लिप्त हो जाता है|


 सहज योग के लाभ

तनाव दूर करे

आज की इस प्रतियोगिता से भरी जिंदगी में व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिन रात जुटा रहता है| जिसके चलते तनाव होना तो स्वाभाविक है|
तनाव के चलते कई समस्याए जैसे मोटापा, सरदर्द आदि होता है|
सहज योग स्वयं को तनावमुक्त रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
इससे हमारे शरीर पर और भी कई सकारात्मक प्रभाव पढ़ते है|

रक्तचाप में फायदेमंद

कुछ किये गए शोधो में यह बात सामने आई है की सहज योग का अभ्यास करने से स्वास्थ से सम्बंधित कई समस्याए ठीक होती है| जैसे की उच्च रक्तचाप, हाइपरटेंशन, कैंसर आदि| जिसके चलते ह्रदय से सम्बंधित रोगों का खतरा नहीं होता|


एकाग्रता बढाए

एकाग्रता बढाने में सहज योग बहुत अधिक फायदेमंद है| जो लोग नियमित इसका अभ्यास करते है उनकी स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढती है|
इसलिए स्टूडेंट्स लोगो को तो यह आसन जरुर करना चाहिए|
एकाग्रता बढ़ने से वे पढ़ाई में अच्छे से मन लगा पाते है|

अन्य फायदे इन्हें भी जानिए:-

  • सहज योग ध्यान करने से थकावट दूर होती है|
  • इससे आपको क्रोध को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है|
  • सहज योग हमें गुणात्मक विशेषताएं प्रदान करते हैं।
  • सहज योग मन की समस्याओं को सुलझाने की सबसे बड़ी कुंजी है|
  • जब दमा, रजोनिवृत्ति के लिहाज से सैकड़ों लोगों पर सहज योग के असर का आकलन किया गया था तो उसका परिणाम उत्साहपूर्वक आया था|


सहजयोग आपनाए और अध्यात्मिक उत्थान पाए |